विचार और विचारधारा मे क्या अंतर है?
: Kosare Maharaj
आप रोज़ रोज़ नए विचार कर सकते हैं , किंतु विचारधारा को रोज़ नहीं बदला जा सकता । ये आपके सोचने के तरीक़े व नज़रिए को भी तय करती है । विचार हर व्यक्ति का अपना स्वमं का होता है पर एक ही विचार पर कई लोगों की सहमति होना या उनको मानना विचार धारा कहलाता है विचार एक व्यक्ति के होते हैं या हो सकते है लेकिन जब किसी विचार को कोई व्यक्ति समुदाय मानने लगते हैं तो वह विचारधारा बन जाता हैं । जैसे कि कोई सैद्धान्तिक तथ्य जो पहले किसी एक आदमी का विचार था लेकिन कालांतर में बहुत सारे लोगो के द्वारा स्वीकार किये जाने से वो विचारधारा में परिवर्तित हो गयी।
पृथ्वी पर मनुष्य के अलावा कोई महान नहीं हैं, मनुष्य में केवल मस्तिष्क महान है – अन्य कुछ नही हैं. मनुष्य के विभिन्न अंगों के गुण मस्तिष्क के आभूषण होते हैं. जब तक मन पर काबू नहीं पाया जाता और राग द्वेष पर कंट्रोल नही होते तब तक मानव इन्द्रियों का गुलाम बना रहता है अपने मन पर काबू करना बहुत कठिन है मगर अपने मन पर काबू पा लिया तो सब कुछ पर काबू पाया जा सकता है हमारा मन श्वेत वस्त्र की भांति निर्मल होता है उसे जिस रंग में डुबोया जाता है उसी रंग में रंग जाता है अगर मन ही मैला है तो बाहरी स्वच्छता का कोई महत्व नहीं है विचारधारा अनेक विचारों से बनती है। और ये विचार समान धारणाओं के इर्द गिर्द घूमते है। जिसकी अलग अलग व्याख्याएं भिन्न भिन्न विचारों को व्यक्त करती हैं।
कोसारे महाराज :- संस्थापक व राष्ट्रीय अध्य्क्ष
मानव हित कल्याण सेवा संस्था नागपुर
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